पटना, 22 मार्च 2026: बिहार के शिक्षा विभाग में नियोजित शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में एक बार फिर बड़ा घपला सामने आया है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance Investigation Bureau) की जांच में पता चला है कि गैर-मान्यता प्राप्त संस्थानों से प्राप्त डिग्री के आधार पर 1346 हिंदी शिक्षक नियुक्त हुए थे। ये शिक्षक मुख्य रूप से 2006 से 2015 के बीच की भर्तियों में शामिल थे, जहां बिहार सरकार ने वर्ष 2008 में ही इन संस्थानों की मान्यता समाप्त कर दी थी।
जांच में क्या सामने आया?
निगरानी ब्यूरो ने पटना उच्च न्यायालय के आदेश पर चल रही जांच में अब तक 6,67,144 प्रमाणपत्रों का सत्यापन पूरा किया है। इस दौरान फर्जी प्रमाणपत्रों और अंकपत्रों के अलावा गैर-मान्यता प्राप्त डिग्री का मामला सबसे बड़ा खुलासा रहा। उत्तर प्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र, चेन्नई और उत्तराखंड के कुछ कॉलेजों, बोर्डों और विश्वविद्यालयों की डिग्री पर ये नियुक्तियां हुईं, जो बिहार में वैध नहीं थीं।
इन 1346 शिक्षकों की सूची निगरानी ब्यूरो ने शिक्षा विभाग को पहले ही भेज दी है, लेकिन विभाग की ओर से अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। जांच के अनुसार, ऐसे शिक्षकों की सेवा समाप्त की जाएगी और अब तक प्राप्त वेतन-भत्तों की वसूली भी की जाएगी। गंभीर मामलों में जेल की सजा और आपराधिक मुकदमा भी दर्ज हो सकता है।
टॉप-10 संस्थान जहां से डिग्री ली गई (संख्या के अनुसार)
हिंदी विद्यापीठ देवघर – 702
मंदिर विद्यापीठ देवघर – 10 (संभावित टाइपो या अलग, लेकिन सूची में)
काशी विद्यापीठ वाराणसी – 176
हिंदी साहित्य सम्मेलन इलाहाबाद – 162
दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा मद्रास – 122
प्रथम महिला विद्यापीठ इलाहाबाद – 119
गुलकुल कोंगड़ी विद्यापीठ हरिद्वार – 46
बंबई हिंदी विद्यापीठ मुंबई – 01
राष्ट्रभाषा प्रचार समिति वर्धा – 01
हिंदी इलाहाबाद – 07
ये आंकड़े निगरानी ब्यूरो की रिपोर्ट पर आधारित हैं, जहां ये संस्थान 2008 के बाद बिहार में अमान्य घोषित हो चुके थे।
जिला-वार टॉप-5 प्रभावित जिले
वैशाली: 159 शिक्षक
सीतामढ़ी: 136
दरभंगा: 81
पटना: 64 (पटना में भी 64 मामले सामने आए)
कटिहार: 77
समस्तीपुर में 136 शिक्षक प्रभावित बताए गए हैं, जो दूसरे स्थान पर है।
क्या होगा आगे?
शिक्षा विभाग ने अब तक इन शिक्षकों को नोटिस जारी नहीं किया है, लेकिन निगरानी ब्यूरो ने विभाग से रिपोर्ट मांगी है। यदि रिपोर्ट नहीं मिली तो विभाग के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है। फर्जी या अमान्य डिग्री पर नौकरी पाने वाले शिक्षकों पर भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज होगा। साथ ही, वेतन की वसूली हर महीने कटौती के रूप में की जा सकती है।
यह मामला बिहार की शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सख्त सत्यापन की जरूरत को फिर से उजागर करता है। पटना हाईकोर्ट के निर्देश पर चल रही यह जांच लाखों प्रमाणपत्रों तक पहुंच चुकी है और आगे भी जारी रहेगी।
(नोट: यह जानकारी सार्वजनिक रिपोर्ट्स और जांच अपडेट्स पर आधारित है। आधिकारिक पुष्टि के लिए निगरानी ब्यूरो या शिक्षा विभाग से संपर्क करें।)
सोर्स दैनिक भास्कर
